“आलू कचालू कहाँ गए थे” एक प्यारी और मज़ेदार बच्चों की कविता है जिसे लगभग हर भारतीय बच्चा बचपन में सुनता या गुनगुनाता है।
इस गीत में आलू कचालू, टमाटर, बैंगन और भिंडी जैसे सब्ज़ियों को मानवीय रूप में दिखाया गया है — जो बच्चों की कल्पना और हंसी दोनों को जगाता है।
यह कविता न केवल मनोरंजन करती है बल्कि शब्दों, तुकबंदी और बोलचाल की भाषा के माध्यम से छोटे बच्चों की भाषा और रचनात्मक सोच को भी विकसित करती है।
माता-पिता और शिक्षक अक्सर इसे राइम टाइम या कविता सत्र में सुनाते हैं ताकि बच्चे खेल-खेल में सीख सकें।
तो चलिए, इस प्यारी कविता “आलू कचालू कहाँ गए थे” के पूरे lyrics (बोल) पढ़ते हैं — और याद करते हैं अपना बचपन का वो मजेदार समय! 🥔🍅💚
Lyrics
आलू कचालू बेटा कहाँ गए थे,
बैंगन की टोकरी में सो रहे थे,
बैंगन ने लात मारी रो रहे थे,
मम्मी ने प्यार किया हंस रहे थे,
पापा ने पैसे दिए नाच रहे थे,
भैया ने लड्डू दिए खा रहे थे |
आलू कचालू बेटा कहाँ गए थे,
गाजर की टोकरी में सो रहे थे
गाजर ने लात मारी रो रहे थे
मम्मी ने प्यार किया हंस रहे थे,
पापा ने पैसे दिए नाच रहे थे,
भैया ने लड्डू दिए खा रहे थे |
आलू कचालू बेटा कहाँ गए थे,
गोभी की टोकरी में सो रहे थे
गोभी ने लात मारी रो रहे थे
मम्मी ने प्यार किया हंस रहे थे,
पापा ने पैसे दिए नाच रहे थे,
भैया ने लड्डू दिए खा रहे थे |
आलू कचालू बेटा कहाँ गए थे,
टमाटर की टोकरी में सो रहे थे
टमाटर ने लात मारी रो रहे थे,
मम्मी ने प्यार किया हंस रहे थे,
पापा ने पैसे दिए नाच रहे थे,
भैया ने लड्डू दिए खा रहे थे |





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