श्री चामुण्डा देवी आरती माँ चामुण्डा के दिव्य और शक्तिशाली रूप की स्तुति है। यह आरती विशेष रूप से माँ की पूजा और चालीसा पाठ के पश्चात गाई जाती है। माँ चामुण्डा को प्रसन्न करने हेतु इस आरती का सच्चे भाव से गान करने से भय, बाधाएं और नकारात्मक शक्तियाँ दूर होती हैं।
माँ चामुण्डा का यह आराधना गीत शक्ति, भक्ति और सुरक्षा का प्रतीक है। भक्त इस आरती को नवरात्रि, अष्टमी या किसी विशेष पूजा के अवसर पर श्रद्धापूर्वक गाते हैं।
इस पृष्ठ पर पढ़ें श्री चामुण्डा देवी की आरती के संपूर्ण हिंदी लिरिक्स और जोड़ें इसे अपने नित्य पूजन में।
माँ चामुण्डा देवी आरती
जय चामुंडा माता मैया जय चामुंडा माता।
शरण आए जो तेरे सब कुछ पा जाता।।
चंड मुंड दो राक्षस हुए हैं बलशाली।
उनको तूने मारा क्रोध द्रष्टि डाली।।
चौंसठ योगिनी आकर तांडव नृत्य करें।
बावन भैरो झूमे विपदा आन हरे।।
शक्ति धाम कहातीं पीछे शिव मंदर।
ब्रह्मा विष्णु मंत्र जपे अंदर।।
सिंहराज यहां रहते घंटा ध्वनि बाजे।
निर्मल धारा जल की वंडेर नदी साजे।।
क्रोध रूप में खप्पर खाली नहीं रहता।
शांत रूप जो ध्यावे आनंद भर देता।।
हनुमत बाला योगी ठाढ़े बलशाली।
कारज पूरण करती दुर्गा महाकाली।।
रिद्धि सिद्धि देकर जन के पाप हरे।
शरणागत जो होता आनंद राज करे।।
शुभ गुण मंदिर वाली ‘ओम’ कृपा कीजे।
दुख जीवन के संकट आकर हर लीजे।।





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