“वो मिट्टी के बेटे, जो वापस न लौटे” – मिट्टी के बेटों को भावुक श्रद्धांजलि गाने के बोल

“वो मिट्टी के बेटे, जो वापस न लौटे” – मिट्टी के बेटों को भावुक श्रद्धांजलि गाने के बोल

“मिट्टी के बेटे” एक ऐसा गीत है जो शब्दों से ज़्यादा एहसास बनकर दिल में उतरता है। यह गीत मिट्टी के बेटे को आवाज़ दी है मशहूर गायक Sonu Nigam ने। यह गीत फ़िल्म Border 2 के साउंडट्रैक का हिस्सा है, जिसका निर्देशन Anurag Singh ने किया है और इसमें Sunny Deol, Varun Dhawan, Diljit Dosanjh और Ahan Shetty जैसे कलाकार नज़र आते हैं।

यह एक Playful mood का गीत है, लेकिन इसके भीतर छुपा दर्द, गर्व और बलिदान इसे बेहद भावुक बना देता है।
गीत का संगीत दिया है Mithoon ने और इसके मार्मिक बोल लिखे हैं Manoj Muntashir ने।

“वो मिट्टी के बेटे, जो वापस न लौटे” सिर्फ़ एक पंक्ति नहीं, बल्कि उन वीर सपूतों की पहचान है जो माँ की गोद से निकलकर तिरंगे की शान बन गए।
जो हँसते-हँसते सरहद तक गए…
और फिर इस देश की मिट्टी में अमर हो गए 🇮🇳

यह ब्लॉग उन्हीं मिट्टी के बेटों को समर्पित है —
जो लौटे नहीं,
लेकिन हर साँस में आज भी ज़िंदा हैं।

क्या मनमौजी बेफिक्रे थे
मौत पे अपनी हँसते थे
दिल में वतन को रखने वाले
सर पे कफ़न भी रखते थे

हम जो तिरंगा लहराएँगे
हिचकी बनके याद आएँगे

वो मिट्टी के बेटे
जो वापस न लौटे
जो वापस न लौटे
वो मिट्टी के बेटे

वो माँ के अलबेले
जो वापस न लौटे
जो वापस न लौटे
वो मिट्टी के बेटे
इस मिट्टी के बेटे

हो..
वो मिट्टी के बेटे
हो..
वो मिट्टी के बेटे
इस मिट्टी के बेटे

जिसके लिए सरदार हमारा
झूल गया था फंदे पर
धूल नहीं लगने दी हमने
उस बेदाग तिरंगे पर
उस बेदाग तिरंगे पर
उस बेदाग तिरंगे पर

तेरा दर्द तू जाने बाबा
तेरा दर्द तू जाने बाबा
मैं तो खुशी से पागल हूँ
जिसकी गोदी में खेला मैं
चला उसी के कंधे पर

भारतलिरिक्स.कॉम

लाड़ले जब सरहद जाएँगे
हिचकी बनके याद आएँगे
वो मिट्टी के बेटे
जो वापस न लौटे
जो वापस न लौटे
वो मिट्टी के बेटे

वो माँ के अलबेले
जो वापस न लौटे
जो वापस न लौटे
वो मिट्टी के बेटे
इस मिट्टी के बेटे

ओ छलिये कहाँ पता था
तू यारों को छल जाएगा
जो चढ़ता सूरज था अपना
वो ऐसे ढल जाएगा
वो ऐसे ढल जाएगा
वो ऐसे ढल जाएगा

तेरे बिन सरहद से हम भी
तेरे बिन सरहद से हम भी
आधे-अधूरे लौटेंगे
तेरी चिता में धीरे से
कुछ अपना भी जल जाएगा

यार गले जब लग जाएँगे
हिचकी बनके याद आएँगे
वो मिट्टी के बेटे
जो वापस न लौटे
जो वापस न लौटे
वो मिट्टी के बेटे

वो बाँके अलबेले
जो वापस न लौटे
जो वापस न लौटे
वो मिट्टी के बेटे
इस मिट्टी के बेटे

कुछ दर्द कभी सोते ही नहीं
वनवास खत्म होते ही नहीं
चौखट पे दिए जलते ही रहे
कुछ राम कभी लौटे ही नहीं
कुछ राम कभी लौटे ही नहीं
कुछ राम कभी लौटे ही नहीं

मेरे नाम का प्याला भर के हो
मेरे नाम का प्याला भर के
बरसातों में पी लेना
बाबा मैं तो रहा नहीं
तू मेरी जवानी जी लेना

हम जब जन गण मन गाएँगे
हिचकी बनके याद आएँगे
वो मिट्टी के बेटे
जो वापस न लौटे
जो वापस न लौटे
वो मिट्टी के बेटे

वो बाँके अलबेले
जो वापस न लौटे
जो वापस न लौटे
वो मिट्टी के बेटे
इस मिट्टी के बेटे