Category: Sanatan Dharam

श्री राणी सती दादी जी की आरती– Shri Rani Sati Dadi Ji Ki Aarti

श्री राणी सती दादी जी की आरती का पाठ भक्तों के जीवन में आस्था, शक्ति, और समृद्धि का संचार करता है। राणी सती दादी जी, जो साहस और त्याग की प्रतीक मानी जाती हैं, अपने भक्तों को कष्टों से मुक्ति [...]

श्री चिंतपूर्णी माता की आरती – Shri Chintpurni Mata ki Aarti

॥ आरती ॥ चिंतपूर्णी चिंता दूर करनी, जग को तारो भोली माँ जन को तारो भोली माँ, काली दा पुत्र पवन दा घोड़ा ॥ ॥ भोली माँ ॥ सिन्हा पर भाई असवार, भोली माँ, चिंतपूर्णी चिंता दूर ॥ ॥ भोली [...]

श्री शांतादुर्गेची आरती – Shri Shanta Durgechi Aarti

॥ आरती ॥ जय देवी जय देवी जय शांते जननी । दुर्गे बहुदु:खदमने रतलो तव भजनी ॥ भूकैलासा ऐसी ही कवला नगरी । शांतादुर्गा तेथे भक्तभवहारी । असुराते मर्दुनिया सुरवरकैवारी । स्मरती विधीहरीशंकर सुरगण अंतरी । जय देवी जय देवी [...]

श्री कैला माता की आरती – Shri Kaila Mata Ki Aarti

॥ आरती ॥ ॐ जय कैला रानी, मैया जय कैला रानी । ज्योति अखंड दिये माँ तुम सब जगजानी ॥ तुम हो शक्ति भवानी मन वांछित फल दाता ॥ मैया मन वांछित फल दाता ॥ अद्भुत रूप अलौकिक सदानन्द माता [...]

श्री वैष्णो माता आरती – Shri Vaishno Mata Aarti

॥ आरती ॥ जय वैष्णवी माता, मैया जय वैष्णवी माता । हाथ जोड़ तेरे आगे, आरती मैं गाता ॥ ॥ जय वैष्णवी माता..॥ शीश पे छत्र विराजे, मूरतिया प्यारी । गंगा बहती चरनन, ज्योति जगे न्यारी ॥ ॥ जय वैष्णवी [...]

श्री कालरात्रि माता की आरती – Shri Kalratri Mata Ki Aarti

नवरात्रि के सातवें दिन माँ दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप की पूजा की जाती है, माँ कालरात्रि की यह अत्यंत महत्वपूर्ण आरती के लिरिक्स कुछ इस प्रकार से हैं। ॥ आरती ॥ कालरात्रि जय-जय-महाकाली । काल के मुह से बचाने वाली [...]

श्री शीतला माता जी की आरती – Shri Sheetla Mata Ji Ki Aarti

॥ आरती ॥ जय शीतला माता, मैया जय शीतला माता । आदि ज्योति महारानी, सब फल की दाता ॥ ॐ जय शीतला माता..॥ रतन सिंहासन शोभित, श्वेत छत्र भाता । ऋद्धि-सिद्धि चँवर ढुलावें, जगमग छवि छाता ॥ ॐ जय शीतला [...]

श्री झूलेलाल जी की आरती – Shri Jhulelal Ji Ki Aarti

चेटी चंड जैसे त्यौहारों तथा सिंधी समाज के अन्य कार्यक्रमों में सबसे ज्यादा गाई जाने वाली आरती। भगवान झूलेलाल के प्रत्येक मंदिर में यह आरती सुवह-शाम अवश्य गायी जाती है। भगवान झूलेलाल को लाल साई, उदेरो लाल, वरुण देव, दूलह [...]

पंच परमेष्ठी आरती – Panch Parmeshthi Aarti

॥ आरती ॥ इह विधि मंगल आरति कीजे, पंच परमपद भज सुख लीजे । इह विधि मंगल आरति कीजे, पंच परमपद भज सुख लीजे ॥ पहली आरति श्रीजिनराजा, भव दधि पार उतार जिहाजा । इह विधि मंगल आरति कीजे, पंच [...]

श्री चन्द्र देव की आरती – Shri Chandra Dev Ki Aarti

॥ आरती ॥ ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा । दुःख हरता सुख करता, जय आनन्दकारी । रजत सिंहासन राजत, ज्योति तेरी न्यारी । दीन दयाल दयानिधि, भव बन्धन हारी । जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे [...]

श्री नाथ जी की संध्या आरती – गोरखनाथ मठ – Shri Nathji Sandhya Aarti – Gorakhnath Math

श्री गुरु गोरक्षनाथ जी की संध्या आरती ॥ आरती ॥ श्री गुरु गोरक्षनाथ जी की संध्या आरती ऊँ गुरुजी शिव जय जय गोरक्ष देवा। श्री अवधू हर हर गोरक्ष देवा । सुर नर मुनि जन ध्यावत, सुर नर मुनि जन [...]

श्री नाथ जी की मंगल आरती – गोरखनाथ मठ – Shri Nathji Mangal Aarti – Gorakhnath Math

॥ आरती ॥ जय गोरख योगी (श्री गुरु जी) हर हर गोरख योगी । वेद पुराण बखानत, ब्रह्मादिक सुरमानत, अटल भवन योगी । ऊँ जय गोरख योगी ॥ बाल जती ब्रह्मज्ञानी योग युक्ति पूरे (श्रीगुरुजी) योग युक्ति पूरे । सोहं [...]

श्री गायत्री माता आरती – Shri Gayatri Mata Ki Aarti

॥ आरती ॥ जयति जय गायत्री माता, जयति जय गायत्री माता । सत् मारग पर हमें चलाओ, जो है सुखदाता ॥ ॥ जयति जय गायत्री माता..॥ आदि शक्ति तुम अलख निरंजन जगपालक क‌र्त्री । दु:ख शोक, भय, क्लेश कलश दारिद्र [...]

श्री पार्वती माता जी की आरती – Shri Parvati Mata Ji Ki Aarti

॥ आरती ॥ जय पार्वती माता, जय पार्वती माता ब्रह्मा सनातन देवी, शुभ फल की दाता । ॥ जय पार्वती माता… ॥ अरिकुल कंटक नासनि, निज सेवक त्राता, जगजननी जगदम्बा, हरिहर गुण गाता । ॥ जय पार्वती माता… ॥ सिंह [...]

श्री बालाजी आरती – Shri Balaji Ki Aarti

श्री हनुमान जन्मोत्सव, मंगलवार व्रत, शनिवार पूजा, बूढ़े मंगलवार और अखंड रामायण के पाठ में प्रमुखता से गाये जाने वाली आरती है ॥ आरती ॥ ॐ जय हनुमत वीरा, स्वामी जय हनुमत वीरा । संकट मोचन स्वामी, तुम हो रनधीरा [...]

श्री भैरव देव जी आरती – Shri Bhairav Dev Ji Ki Aarti

॥ आरती ॥ ॥ श्री भैरव देव जी आरती ॥ जय भैरव देवा, प्रभु जय भैरव देवा । जय काली और गौर देवी कृत सेवा ॥ ॥ जय भैरव देवा…॥ तुम्ही पाप उद्धारक दुःख सिन्धु तारक । भक्तो के सुख [...]