आरती श्री कुंज बिहारी की – Aarti Shri Kunj Bihari Ki

आरती श्री कुंज बिहारी की – Aarti Shri Kunj Bihari Ki

आरती श्री कुंज बिहारी की, जो भगवान श्री कृष्ण को समर्पित है, हिन्दू धर्म में गहरा आध्यात्मिक महत्व रखती है। भगवान कृष्ण को उनकी लीलाओं, प्रेम, और दिव्यता के लिए पूजा जाता है। “कुंज बिहारी” श्री कृष्ण का एक नाम है जिसका अर्थ है ‘वृंदावन के बगीचों में विहार करने वाले’। यह आरती भक्तों को भगवान कृष्ण के निकट लाती है और उनके प्रति भक्ति और प्रेम को व्यक्त करने का एक माध्यम प्रदान करती है।

आरती का महत्व

  • आध्यात्मिक संबंध: आरती भक्त और भगवान के बीच एक गहरे आध्यात्मिक संबंध को मजबूत करती है।
  • शांति और संतोष: यह आरती करने से भक्तों को आत्मिक शांति और संतोष की अनुभूति होती है।
  • सकारात्मक ऊर्जा: आरती के दौरान उत्पन्न सकारात्मक ऊर्जा से घर और परिवार के वातावरण में शुद्धि और सकारात्मकता आती है।

आरती करने की विधि

  1. तैयारी: श्री कृष्ण की मूर्ति या चित्र के सामने एक पवित्र स्थान पर आरती करने की तैयारी करें।
  2. दीपक जलाना: आरती थाली में दीपक जलाएं और उसमें घी या तेल डालें।
  3. धूप और पुष्प: धूप जलाएं और भगवान को पुष्प अर्पित करें।
  4. आरती गाना: श्री कुंज बिहारी की आरती का पाठ या गान करें। इस दौरान आरती की थाली को भगवान कृष्ण की मूर्ति या चित्र के सामने धीरे-धीरे घुमाएं।
  5. प्रसाद अर्पण: आरती के बाद, भगवान को प्रसाद के रूप में फल, मिठाई या अन्य भोजन सामग्री अर्पित करें।
  6. आशीर्वाद प्राप्ति: आरती के समापन पर, भक्त भगवान से आशीर्वाद की कामना करते हैं और उनके सामने शीश झुकाते हैं।

॥ आरती ॥

आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
गले में बैजंती माला,
बजावै मुरली मधुर बाला ।
श्रवण में कुण्डल झलकाला,
नंद के आनंद नंदलाला ।
गगन सम अंग कांति काली,
राधिका चमक रही आली ।
लतन में ठाढ़े बनमाली
भ्रमर सी अलक,
कस्तूरी तिलक,
चंद्र सी झलक,
ललित छवि श्यामा प्यारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

कनकमय मोर मुकुट बिलसै,
देवता दरसन को तरसैं ।
गगन सों सुमन रासि बरसै ।
बजे मुरचंग,
मधुर मिरदंग,
ग्वालिन संग,
अतुल रति गोप कुमारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥

आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

जहां ते प्रकट भई गंगा,
सकल मन हारिणि श्री गंगा ।
स्मरन ते होत मोह भंगा
बसी शिव सीस,
जटा के बीच,
हरै अघ कीच,
चरन छवि श्रीबनवारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥

आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

चमकती उज्ज्वल तट रेनू,
बज रही वृंदावन बेनू ।
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू
हंसत मृदु मंद,
चांदनी चंद,
कटत भव फंद,
टेर सुन दीन दुखारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥

आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥

श्री कृष्ण जी की प्रसिद्ध आरती के लिरिक्स, बोल तथा वीडियो हिन्दी और अंग्रेज़ी में सुन सकते हैं। सिंगर हरिहरन द्वारा गाई आरती लिरिक्स भक्तों में सबसे अधिक प्रसिद्ध है।

आरती श्री कुंज बिहारी की क्यों की जाती है

  • भक्ति भाव: आरती भक्तों को भगवान कृष्ण के प्रति अपनी भक्ति और समर्पण को व्यक्त करने का अवसर प्रदान करती है।
  • मनोकामना पूर्ति: मान्यता है कि इस आरती के माध्यम से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और उन्हें जीवन में सफलता मिलती है।
  • पापों से मुक्ति: आरती करने से भक्तों को उनके पापों से मुक्ति मिलती है और उनका जीवन पवित्र होता है।
  • सकारात्मक ऊर्जा: आरती के माध्यम से घर और परिवार के वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

इस प्रकार, आरती श्री कुंज बिहारी की न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है बल्कि यह एक माध्यम भी है जो भक्तों को आध्यात्मिक शांति, आत्मिक संतोष और भगवान कृष्ण के दिव्य आशीर्वाद की अनुभूति कराता है।

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