“शिव कैलाशो के वासी” एक भक्तिपूर्ण शिव भजन है जो भगवान शिव की अलौकिक महिमा, उनके निवास कैलाश पर्वत, और उनकी करुणा व शक्ति का गुणगान करता है। यह भजन श्रद्धालुओं के हृदय को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देता है और उन्हें शिव की भक्ति में लीन होने का निमंत्रण देता है।
चाहे आप ध्यान साधना कर रहे हों, शिवरात्रि का व्रत कर रहे हों, या बस अपने दिन की शुरुआत एक दिव्य ऊर्जा से करना चाहते हों — यह भजन आपके लिए आदर्श है।
इस पोस्ट में हम आपको इस भजन के शब्द, भावार्थ, और शिव के कैलाशवासी रूप की जानकारी देंगे, ताकि आप न केवल इसका आनंद लें बल्कि इसकी आध्यात्मिक गहराई को भी समझ सकें।
शिव कैलाशो के वासी,
धौली धारों के राजा,
शंकर संकट हरना,
शंकर संकट हरना ॥
तेरे कैलाशों का अंत ना पाया,
तेरे कैलाशों का अंत ना पाया,
अंत बेअंत तेरी माया,
ओ भोले बाबा,
अंत बेअंत तेरी माया,
शिव कैलाशों के वासी,
धौली धारों के राजा,
शंकर संकट हरना,
शंकर संकट हरना ॥
बेल की पत्तियां भांग धतुरा,
बेल की पत्तियां भांग धतुरा,
शिव जी के मन को लुभायें,
ओ भोले बाबा,
शिव जी के मन को लुभायें
शिव कैलाशों के वासी,
धौली धारों के राजा,
शंकर संकट हरना,
शंकर संकट हरना ॥
एक था डेरा तेरा,
चम्बे रे चौगाना,
दुज्जा लायी दित्ता भरमौरा,
ओ भोले बाबा,
दुज्जा लायी दित्ता भरमौरा,
शिव कैलाशों के वासी,
धौली धारों के राजा,
शंकर संकट हरना,
शंकर संकट हरना ॥
शिव कैलाशो के वासी,
धौली धारों के राजा,
शंकर संकट हरना,
शंकर संकट हरना ॥





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